श्री नवखंडा पार्श्वनाथ का इतिहास और चमत्कार कहानी Navkhanda Parshwanath Story

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श्री नवखंडा पार्श्वनाथ का इतिहास और चमत्कार कहानी Navkhanda Parshwanath Story

सौराष्ट्र देश में भावनगर जिले में घोघा गाँव में नवखंडा पार्श्वनाथ प्रभु का तीर्थ आया हुआ है|
वि.सं. ११३८ में पू. आचार्य श्री महेंद्रसूरीजी म.सा. के उपदेश से श्रीमाली ज्ञाति के हीरूभाई नाणावटी से पार्श्वनाथ प्रभु के भव्य जिनालय का निर्माण कराया था|

वर्षो तक यह तीर्थ भव्य जीवों को मुक्ति मार्ग की अपूर्व प्रेरणा देता रहा| एक बार म्लेछो ने इस तित पर आक्रमण किया और पार्शवनाथ प्रभु की मूर्ति के नौ टुकड़े कर डाले| इन म्लेच्छो ने उन नौ टुकडो को पोटली में बांधकर कुँए में दाल दिए|

कुछ समय व्यतीत होने पर अधिष्ठायक देव ने घोघा के किसी श्रावक को दैविक संकेत दिया| स्वप्न के अनुसार उस श्रावक ने वह पोटली कुँए में से बाहर निकाली और उन टुकडो को नौ मण लापसी में रख दिए| दैविक संकेत था की ९ दिन बाद उस लापसी में रख दिए| दैविक संकेत था नौ दिन पूर्ण होने की प्रतीक्षा कर रहे थे|

ठीक आठवे दिन भरोच नगर से एक संघ घोघा आ पहुंचा| संघ्के यात्रीको ने प्रभु दर्शन की इच्छा व्यक्त की| इसके फल स्वरुप आठवे दिन ही उस प्रतिमा को बाहर निकाल दी| प्रतिमा के नौ खंड जुड़ गए थे परंतु अधीरता के कारण नौ खंडो के संधि-स्थल लुप्त नहीं हो पाए| आज भी उस प्रतिमा में नौ खंड के निशाँ दिखाई देते है| इस कारण इस पार्श्वनाथ प्रभु को नौ खंडा पार्श्वनाथ प्रभु के नाम से जाना-पहिचाना जाता है|तीन शिखरों से सुशोभित इस मंदिर का रंग मंडप अति विशाल है|

यह प्रतिमा परिकर युक्त श्याम वर्णीय है| प्रतिमा की उंचाई फणा सहित ३६ इंच व चोडाई २४.२५ इंच है| प्रतिमा के ऊपर नौ फण है|

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