श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ -सूरत का इतिहास Shri Shastrfana Parshwanath Surat

 श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ -सूरत का इतिहास Shri Shastrfana Parshwanath Surat

सूरत के गोपीपूरा में श्री शीतलनाथ प्रभु के जिन मंदिर के भोयरे में श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ प्रभु की भव्य प्रतिमा प्रतिष्टित है|
श्री जिनलाभसूरीजी म.सा. की वैराग्यपोषक धर्मवाणी के श्रवण से सूरत के शेष्ठीवर्य श्री भाईदास नेमिदास ने श्री सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ का भव्य जिनालय खड़ा किया था|
वि.सं. १८२७ वैशाख सुदी १२ के दिन सूरिदेव के वरद हस्तो से १८१ जिनबिंबो की अंजनशलाका संपन्न हुई थी और उस मंदिर में मुलनायक के रूप में श्री शीतलनाथ प्रभु की स्थापना की गयी थी|


प्रतिष्ठा के १ वर्ष बाद वै.सु. १२ संवत् १८२८ के शुभ दिन सहस्त्रफणा पार्श्वनाथ की प्रतिष्ठा संपन्न हुई थी|
एक ही पाषण में से निर्मित इस भव्य प्रतिमा में कलावैभव के दर्शन होते है| कमल के पुष्प पर खड़ी इस भव्य प्रतिमा भक्तजन के ह्रदय को मोहित कर देने वाली है|
प्रभु के चरनों में पद्मावती देवी की रचना है तथा परिकर में पार्श्वनाथ प्रभु के दस गणधरो की भव्य प्रतिमाए है|

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