सामायिक 48 मिनट की ही क्यों? जानकर आप चौंक जाएँगे!!!

सामायिक 48 मिनट की ही क्यों?

जिंदगी भर दौड़-दौड़ कर धन को जोड़ता है आदमी,
कमाने के चक्कर मे धर्म से मुख मोड़ता है आदमी ।

जिंदगी भर पापों का करता है collection,
बाद में होता है उसका reaction ।

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घर- घर में बढ़ती बीमारियाँ और सुख-शांति की कमी धर्म का अभाव और पाप का प्रभाव है ।

जो छह काय के जीवों को सुख देता है, उसे सुख मिलता है । धन क्षणिक सुख दे पाये या न दे पाये, पर जीवों को अभयदान देने वाली सामायिक अनंत सुख देती है ।

48 minute की सामायिक से अठारह पापों का त्याग, आठ कर्मों का क्षय और समभाव की प्राप्ति होती है ।

पूरे संसार का धन देवलोक के एक देव की जूती भी खरीद नहीं सकता और ऐसे असंख्य देवता मिलकर भी एक सामायिक को नहीं खरीद सकते ।

सामायिक में स्वाध्याय, ज्ञान-ध्यान फेरने या प्रवचन सुनने से ज्ञान-दर्शन बढ़ता है और ज्ञानावरणीय एवं दर्शनावरणीय कर्म का क्षय होता है ।

48 मिनिट तक सभी जीवों को अभयदान देने से सातावेदनीय कर्म का बंध और असातावेदनीय कर्मों का क्षय होता है ।

समभावों में रमण करने से मोहनीय कर्म की निर्जरा होती है ।

सामायिक में मन में दया भाव रहता है । उस समय आयुष्य कर्म का बंध हुआ तो जीव देवलोक में जाता है ।

सामायिक में मन की सरलता होती है इसलिए शुभ नाम कर्म का बंध होता है ।

सामायिक में उच्च गोत्र का बंध ही होता है ।

सामायिक में किसी को भी अंतराय नहीं देते हैं इसलिए अंतराय कर्म का क्षय होता है ।

आठों ही कर्मों का क्षय एक सामायिक से होता है । इसलिए 64 हजार रानियां और 32 हजार देशों के मालिक चक्रवर्ती सम्राट भी सब कुछ छोड़कर 32 दोष रहित शुद्ध सामायिक को स्वीकार करते हैं तो उनका जीवन भी सार्थक हो जाता है ।

तीर्थंकर भगवान भी जब साधना क्षेत्र (दीक्षा) में प्रवेश करते हैं तो सबसे पहले सामायिक ही ग्रहण करते हैं । जो जीव मोक्ष में गए हैं या जायेंगे वो सब सामायिक के प्रभाव से ही जायेंगे ।

400 किलो सोने की एक खंडी – ऐसी एक लाख खंडी का एक लाख वर्ष तक भी कोई व्यक्ति दान देवे फिर भी एक सामायिक की बराबरी नहीं कर सकता ।

इसलिए दिल में ठान लें कि, चाहे कुछ भी मजबूरी हो, एक सामायिक प्रतिदिन जरूरी हो ।

सामायिक बंधन नहीं, बंधनों से मुक्ति है ।

नोट :- यह लेख किसी विशेष धर्म, जाती, समुदाय, सम्प्रदाय, किसी विशेष व्यक्ति पर नही लिखा गया है ।
लेखन में जाने-अनजाने में कही भी भूल, त्रुटि रह गयी हो तो… कृपया क्षमा करें, करबद्ध मिच्छामी दुक्कड़म् ।

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