Gyan ki baatein in Hindi – देने की भावना ज्ञान की बाते

Spread the love

Gyan ki baatein in Hindi – देने की भावना ज्ञान की बाते

दोस्तों, हम सभी जानते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें motivation और प्रेरणा की जरूरत होती है| जीवन में हम हर किसी से कुछ ना कुछ सीखते रहते हैं, लेकिन फिर भी बहुत सी चीजें ऐसी होती है जो हम अपने आसपास की चीजों से भी नहीं सीख पाते| इसी संदर्भ में हम कुछ ज्ञान की बातें (Gyan ki baatein in Hindi) बताने जा रहे हैं जो जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए हमें प्रेरित करती है!

Gyan ki baatein in Hindi – देने की भावना

जीवन और मृत्यु पर किसी का बस नहीं है| फिर भी जीने की इच्छा बहुत प्रबल है| लोग अपने अपने तरीकों और कारणों से इस जीवन को जी रहे हैं| किसी को धन चाहिए, किसी को प्रतिष्ठा, किसी को परिवार, और किसी को शोहरत| हर कोई इस जीवन में कुछ न कुछ लेना चाहता है, पाना चाहता है| लेकिन देने की किसी में कोई दिलचस्पी नहीं है|

Image result for त्याग की भावना

Gyan ki Baatein in Hindi | Gyan ki Bate | देने की भावना

दोस्तों, हम सभी जानते हैं कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए हमें motivation और प्रेरणा की जरूरत होती है| जीवन में हम हर किसी से कुछ ना कुछ सीखते रहते हैं, लेकिन फिर भी बहुत सी चीजें ऐसी होती है जो हम अपने आसपास की चीजों से भी नहीं सीख पाते| इसी संदर्भ में हम कुछ ज्ञान की बातें (Gyan ki baatein in Hindi) बताने जा रहे हैं जो जीवन को सही दिशा में ले जाने के लिए हमें प्रेरित करती है-

Gyan ki baatein in Hindi – देने की भावना

जीवन और मृत्यु पर किसी का बस नहीं है| फिर भी जीने की इच्छा बहुत प्रबल है| लोग अपने अपने तरीकों और कारणों से इस जीवन को जी रहे हैं| किसी को धन चाहिए, किसी को प्रतिष्ठा, किसी को परिवार, और किसी को शोहरत| हर कोई इस जीवन में कुछ न कुछ लेना चाहता है, पाना चाहता है| लेकिन देने की किसी में कोई दिलचस्पी नहीं है|

 

प्राप्त करने की इच्छा इतनी प्रबल होती जाती है कि मनुष्य कुछ भी करने को तैयार हो जाता है| इस दुनिया में अधिकांश लोग सब कुछ पा लेने में ही लगे रहते हैं| इसी वजह से समाज दो हिस्सों में बंटा हुआ है|

“”हमें जो मिला है हमारे भाग्य से ज्यादा मिला है, यदि आपके पाँव  में जूते नहीं है,

तो अफ़सोस मत करिए दुनिया में कई लोग ऐसे भी हैं जिनके पाँव ही  नहीं हैं|””

एक वर्ग उन लोगों का है जो मनचाहा प्राप्त करने में समर्थ  है| दूसरी तरफ वे लोग हैं जिन्हें अन्य लोगों का सहारा चाहिए| जिसके पास सब कुछ है वह देने की इच्छा नहीं रखता|जो असहाय हैं, अभावग्रस्त  हैं और निर्बल  है, वह इस सभ्य समाज से बहुत कुछ अपेक्षा रखते हैं| लेकिन होता विपरीत है|

शीत ऋतु भी ग्रीष्म ऋतु का स्वागत करती है| दिन, हमेशा रात का स्वागत करता है| दिन का रात में बदलना और ऋतु का आना-जाना प्रकृति के इस अद्भुत आकर्षण को बनाए रखता है| इसी तरह मनुष्य में देने की प्रवृत्ति जन्म लेती है, तो उसका प्रभाव बनता है| अन्य लोग प्रेरित होते हैं|

Please follow and like us:
error

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *